मूल्यांकन से शाला उन्नयन की एक सकारात्मक पहल

सीखने-सिखाने के लिए भयमुक्त एवं आनंददायी वातावरण का निर्माण

समावेश के वातावरण का निर्माण

प्रत्येक विद्यालय अपने परिप्रेक्ष्य, आकार, परिस्थिति और संसाधन के संदर्भ में विशिष्ट होता है।

प्रत्येक विद्यालय अपनी वर्तमान गतिविधियों को आलोचनात्मक विश्लेषण के आधार पर अपने सशक्त एवं कमज़ोर पहलुओं की पहचान करे और अपनी न्यूनताओं को दूर करने का प्रयास करे।

शाला मूल्यांकन अपने अनुभवों के सामूहिक आदान-प्रदान और चिंतन के माध्यम से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को समृद्ध करता है।

शाला मूल्यांकन एक साधन है और शाला उन्नयन लक्ष्य

सबको शिक्षा अच्छी शिक्षा

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश

शाला सिद्धि के बारे में

“शाला सिद्धि – हमारी शाला ऐसी हो” कोई नया कार्यक्रम नहीं हैं अपितु पूर्व वर्षों में शिक्षा की गुणवत्ता के क्षेत्र में किये गए विभिन्न प्रयासों को एकीकृत कर इन्हें सुनियोजित रूप से क्रियान्वयन करने का प्रयास है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हेतु शाला का उन्नयन से तात्पर्य यह है कि शाला का विकास इस प्रकार से हो कि शाला की अकादमिक एवं सह-अकादमिक प्रक्रियाओं से विद्यार्थियों को भयमुक्त एवं आनंददायी वातावरण में सीखने के अवसर मिलें और प्रत्येक विद्यार्थी अपनी आयु के अनुरूप निर्धारित दक्षताएँ और कौशलों को अर्जित कर सके।

कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य

1

शालाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया विकसित करने के लिए तकनीकी रूप से उत्तम वैचारिक प्रक्रिया का निर्माण करना तथा उनके लिए प्रक्रिया और उपकरण (प्रपत्र) निश्चित करना।

2

शाला मूल्यांकन हेतु राज्य में एक संस्थागत प्रक्रिया निश्चित करना तथा उसका क्रियान्वयन करना।

3

शाला मूल्यांकन हेतु शालाओं तथा सम्बन्धित अधिकारियों को सक्षम बनाना जिससे शालाएँ निरंतर उन्नति कर सक्षम बनी रहें।

4

शाला को इस प्रकार सहयोग देना कि वे अपनी आवश्यकताओं का विश्लेषण कर उनकी पूर्ति हेतु निरंतर प्रयास करने में सक्षम हों।

शाला सिद्धि कार्यक्रम की प्रक्रिया

1स्व
मूल्यांकन

2बाह्य
मूल्यांकन

3शाला उन्नयन
कार्ययोजना

4फ़ॉलोअप
करना

शाला सिद्धि के आयाम एवं मानक

आयाम

गुणवत्तायुक्त शिक्षा के लिए कई कारक उत्तरदायी होते हैं, जैसे शाला में उपलब्ध भौतिक संसाधन, प्रशिक्षित शिक्षक, उनका व्यावसायिक उन्नयन, कक्षागत प्रक्रियाएँ, शैक्षिक सहायक सामग्री की उपलब्धता, उनका उपयोग, शाला में शाला-प्रमुख की भूमिका, शाला के विकास में समुदाय का सहयोग इत्यादि। इन क्षेत्रों को इस कार्यक्रम में मूल्यांकन के आयाम कहा गया है।

मानक

प्रत्येक आयाम शाला के सुधार हेतु एक बड़ा कार्य क्षेत्र है, इसलिए प्रत्येक आयाम को छोटे-छोटे मानकों में बांटा गया है।

स्तर पर शालाओं द्वारा चयनित शीर्ष मानक

शालाओं की संख्या

  •  आयाम 1 (उपलब्धता)
  •  आयाम 1 (गुणवत्ता)
  •  आयाम 2
  •  आयाम 3
  •  आयाम 4
  •  आयाम 5
  •  आयाम 6
  •  आयाम 7

राज्य स्तर पर प्राथमिकता क्षेत्र

  • स्तर पर उन्नयन हेतु शालाओं द्वारा शीर्ष चयनित सुधार के चिन्हित क्षेत्र

    मानक

    शालाओं की संख्या

  • स्तर पर उन्नयन हेतु शालाओं द्वारा शीर्ष चयनित सुधार के चिन्हित क्षेत्र

स्तर पर उन्नयन हेतु शालाओं द्वारा शीर्ष चयनित सुधार के चिन्हित क्षेत्र

शालाओं की संख्या

  •  आयाम 1 (उपलब्धता)
  •  आयाम 1 (गुणवत्ता)
  •  आयाम 2
  •  आयाम 3
  •  आयाम 4
  •  आयाम 5
  •  आयाम 6
  •  आयाम 7
  • शाला सिद्धि अंतर्गत शेष शालाओं के फॉलोअप हेतु राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा निर्देश जारी - दिनांक 15 अक्टूबर 2018 को राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा शाला सिद्धि सिद्धि अंतर्गत चयनित शेष शालों हेतु निर्देश जारी कर दिए गए. पूर्व में लगभग 1800 चैंपियन शालाओं का फॉलोअप पोर्टल पर जिलों द्वारा दर्ज कर दिया गया है. इस चरण में शेष 23000 शालाओं का फॉलोअप किया जायेगा.

  • चैंपियन शालाओं के राज्य स्तरीय सेमिनार का आयोजन राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा दिनांक 28 एवं 29 सितम्बर 2018 को एप्को,भोपाल में किया गया. इसमें 51 जिलों के 204 चयनित चैंपियन स्कूलों ने सहभागिता की. कार्यक्रम में मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा श्रीमती दीप्ति गौड मुकर्जी, संचालक राज्य शिक्षा केंद्र आईरिन सिंथिया जे. पी. ने सहभागिता की. आर्क सेंट्रल टीम से उर्मिला चौधरी ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की.

  • मध्य प्रदेश की सभी शासकीय शालाओं में नवीन सत्र का प्रारंभ 02 अप्रेल 2018 से किया गया है। इस सत्र के प्रारंभ में ‘स्कूल चलें हम’ कार्यक्रम एवं ‘जॉयफुल लर्निंग’ गतिविधि का आयोजन सभी शालाओं में किया जा रहा है। शालाओं में आनंददायी वातावरण का निर्माण करने हेतु ‘जॉयफुल लर्निंग’ गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसका लक्ष्य शाला में बच्चों हेतु मजेदार वातावरण का निर्माण करना तथा बच्चों की सहभागिता को बढ़ावा देना है। साथ ही इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चो की मूलभूत दक्षताओं में वृद्धि का कार्य भी किया जाना है।

  • प्रत्येक विकासखंड से कम से कम एक जनशिक्षा केंद्र को शाला-सिद्धि उत्कृष्ट जनशिक्षा केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

  • शाला सिद्धि कार्यक्रम अंतर्गत अकादमिक वर्ष 2017-18 में सभी जनशिक्षा केन्द्रों से नवीन चयनित 12,396 शालाओं में स्व मूल्यांकन एवं बाह्य मूल्यांकन कर कार्य योजना तैयार की जाएगी।